प्रदूषण पर निबंध | Essay on Pollution in Hindi

प्रकृति ने समस्त जीवधारियों के लिए पर्यावरण का निर्माण किया है, जो उनके जीवन यापन करने के लिए अनुकूल होता है। अगर प्रकृति द्वारा बनाए गए पर्यावरण में किसी प्रकार का अनावश्यक परिवर्तन होता है, तो इससे समस्त जीवधारियों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना होती है। वैज्ञानिकों तथा शोधकर्ताओं द्वारा इसे पर्यावरण प्रदूषण का नाम दिया गया है। आज के इस पोस्ट में हम Pollution Essay in Hindi के बारे में चर्चा करेंगे।

अगर आप एक student है, तो यह पोस्ट आपके लिए बहुत ही लाभदायक है। आप इस पोस्ट की मदद से अपने विद्यालय के लिए प्रदूषण पर निबंध (Essay on Pollution in Hindi) लिख सकते हैं।

Essay on Pollution in Hindi

Pollution Essay in Hindi

 

Pradushan Par Nibandh – प्रस्तावना

हमारे चारों ओर का वातावरण पर्यावरण कहलाता है, जिसमें हम जैसे मनुष्य तथा जीव-जंतु आदि के लिए प्रकृति ने आवश्यक वस्तुएं जैसे शुद्ध वायु तथा जल और हमें जीवित रहने के लिए उचित तापमान आदि प्रदान किया है। लेकिन औद्योगिक प्रगति एवं मानव सभ्यता के विकास के कारण इन सभी चीजों की शुद्धता पर कमी आ रही है।

मनुष्य का जीवन मुख्य रूप से स्वच्छ वायु और जल पर निर्भर है, लेकिन यदि यह चीजें दूषित हो जाए, तो इससे मनुष्य के जीवन पर खतरे की आशंका बढ़ जाती है।

प्रदूषण से प्राकृतिक असंतुलन पैदा होता है, जो मानव जीवन के लिए खतरनाक है। इसलिए यह आवश्यक है कि बढ़ते हुए प्रदूषण के खतरे को कम किया जाए और इसके समाधान के उपाय खोजे जाएं।

आइये अपने इस पोस्ट Essay on Pollution in Hindi में और आगे बढ़ते हैं तथा प्रदुषण के बारे में और विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।

प्रदूषण का अर्थ  | Meaning of Pollution in Hindi

सभी जीवधारियों के जीवन का विकास प्रकृति द्वारा प्रदान किए गए स्वच्छ वातावरण में ही संभव है। यदि इस वातावरण के जैविक, रासायनिक या भौतिक गुणों में किसी प्रकार का अवांछित परिवर्तन होता है, तो वह मनुष्य तथा जीव जंतुओं के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। यदि इससे पर्यावरण की उपयोगिता और प्राकृतिक गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी आती है, तो यह पर्यावरण प्रदूषण कहलाता है।

यह पर्यावरण प्रदूषण समस्त जीवधारियों के जीवन के विकास में विभिन्न प्रकार से हानिकारक प्रभाव डालता है। इस प्रदूषण के अंतर्गत जीवन के लिए आवश्यक तत्वों जैसे मृदा, जल, वायु आदि में हानिकारक तत्वों का समावेश हो जाता है।

प्रदूषण के कारण | Causes of Pollution in Hindi

मनुष्यों के असंतुलित जीवन शैली तथा विज्ञान का दुरुपयोग और औद्योगिक विकास के लिए वनों की कटाई प्रदूषण का प्रमुख कारण है। इसके अलावा नीचे कुछ प्रमुख कारण बताए गए हैं, जिनसे पर्यावरण प्रदूषण होता है।

  • अपशिष्ट पदार्थों का प्रबंधन सही तरीके से ना किया जाना और कारखानों तथा घरों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ को खुले स्थान पर रखना और उनको जलाने के कारण
  • मानव की बढ़ती जनसंख्या और इसके द्वारा प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी होने के कारण
  • वनों की कटाई तथा उद्योगों तथा वाहनों आदि से निकलने वाले धुएं से
  • मनुष्य द्वारा औद्योगीकरण तथा शहरीकरण के लिए प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग करने पर
  • विभिन्न प्रकार के परमाणु हथियारों का निर्माण और उनके उपयोग करने के कारण
  • हानिकारक कीटनाशक तथा रासायनिक तत्वों के जल वायु तथा मृदा में समावेश होने के कारण

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प्रदूषण के प्रकार | Types of Pollution in Hindi

आज के समय में प्रमुख रूप से प्रदूषण मुख्यतः 5 प्रकार के है, जो मनुष्य के जीवन के लिए नुकसानदायक अवस्था में है।

1. वायु प्रदूषण

सभी प्राणियों को जीवित रहने के लिए स्वच्छ वायु की आवश्यकता अनिवार्य रूप से होती है, इसलिए वायुमंडल में इसका सही अनुपात में उपस्थित होना अति आवश्यक है।

सभी जीवित प्राणी सांस के द्वारा ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं, और कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़ते हैं। जबकि पेड़-पौधे कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं और हमारे लिए शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, जिससे वायुमंडल में ऑक्सीजन की आवश्यक मात्रा सदैव उपस्थित रहती हैं।

लेकिन मनुष्य की अज्ञानता और औद्योगीकरण तथा शहरीकरण के लिए वनों की कटाई के कारण, वायुमंडल में वाहनों, उद्योग आदि से निकलने वाले कार्बन डाइऑक्साइड गैस तथा अन्य हानिकारक तत्वों की अधिकता के कारण ऑक्सीजन का संतुलन बिगड़ गया है। और हानिकारक तत्वों में वृद्धि आ गई है, जो समस्त प्राणियों के लिए हानिकारक है।

इसके कारण फेफड़ों से संबंधित तथा अन्य श्वास संबंधी रोगों में वृद्धि हुई है, जो मानव के लिए हानिकारक है। इसके कारण आंखों में जलन तथा कैंसर तथा हृदय संबंधी बीमारियां होने लगती है, जिससे जीव जंतुओं की आकस्मिक मृत्यु हो जाती है।

2. जल प्रदूषण

आज के समय में जल प्रदूषण एक बहुत बड़ी समस्या के रूप में उभर रहा है, क्योंकि हमारी नदियों तथा समुद्रों में अपशिष्ट पदार्थ जैसे प्लास्टिक की थैलियां तथा रासायनिक पदार्थों की मात्रा चिंताजनक रूप से बढ़ रही है।

शहरों के सीवर निकलने वाले गंदे पानी तथा उद्योग तथा कारखाने से निकलने वाले कूड़े कचरे और रासायनिक पदार्थ सीधे ही नदी नालों में छोड़ दिए जाते हैं, जो समुद्र में पहुंचता है। जिसके कारण समुद्र का पानी दूषित हो चुका है, और इससे ना सिर्फ समुद्र में रहने वाले जीव जंतु के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है, बल्कि हम इंसानों के लिए भी यह खतरनाक है। इसके कारण अम्लीय वर्षा हो रही है।

3. ध्वनि प्रदूषण

वर्तमान समय में तकनीकी विकास के चलते ध्वनि प्रदूषण भी खतरनाक स्तर पर बढ़ रहा है। यह प्रदूषण वाहनों, हवाई जहाज तथा समुद्री जहाज आदि से निकलने वाली आवाज और लाउडस्पीकर, वाहनों के हॉर्न तथा विभिन्न प्रकार की मशीनों से उत्पन्न होने वाली ध्वनि से होता है।

वर्तमान समय में विभिन्न प्रकार के शादी, पार्टी आदि जैसे समारोह लाउडस्पीकर बहुत तेजी से बजाए जाते है, इसके अलावा हमारे देश में वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण उन से उत्पन्न होने वाली ध्वनि इस प्रदूषण का प्रमुख कारण है।

ध्वनि प्रदूषण के कारण इंसान के बहरे होने की संभावना तथा उसके मानसिक संतुलन खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए जहां पर अधिक मात्रा में शोर उत्पन्न हो वहां पर इंसान को ज्यादा देर तक नहीं रुकना चाहिए। इसके अलावा ध्वनि प्रदूषण से बुजुर्गों तथा छोटे बच्चों को अधिक परेशानी होती है।

4. मृदा प्रदूषण

मृदा प्रदूषण का मुख्य कारण इंसानों के द्वारा अपने स्वार्थ के लिए किया गया कार्य ही है। वर्तमान समय में खेती करने के लिए इंसान कीटनाशकों तथा रासायनिक पदार्थों जैसे यूरिया तथा नाइट्रोजन आदि का प्रयोग बहुत अधिक मात्रा में करने लगा है। जिसके कारण उस जमीन की उपजाऊ क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगी है और वह जमीन बंजर होने लगी है।

इसके अलावा इंसान अस्पतालों, कारखानों, शहरों तथा फैक्ट्रियों से निकलने वाले हानिकारक तथा रासायनिक अपशिष्ट पदार्थों जैसे प्लास्टिक आदि को ऐसे ही कहीं पर फेंक देते हैं या उन्हें जमीन में दफना देते हैं। जिसके कारण मृदा प्रदूषण हानिकारक रूप से बढ़ रहा है।

मृदा प्रदूषण के कारण जमीन से उत्पन्न होने वाले फलों, अनाजों तथा सब्जियों की गुणवत्ता में कमी आ रही है, जिसके सेवन से इंसान तथा जीव जंतुओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

5. रेडियोधर्मी प्रदूषण

रेडियोधर्मी प्रदूषण का मुख्य कारण रेडियोएक्टिव पदार्थों से उत्पन्न होने वाले विकिरण से होता है। वर्तमान समय में सभी देश अपने लिए बिजली की जरूरत को पूरा करने के लिए तथा खुद को शक्तिशाली बनाने के लिए परमाणु हथियारों का जखीरा इकट्ठा करने में लगे हुए हैं।

इसके लिए वे विभिन्न परमाणु परीक्षण जैसे परमाणु विखंडन तथा परमाणु संलयन आदि के द्वारा परमाणु हथियारों का निर्माण कर रहे हैं। जो पूरी मानव सभ्यता के लिए सबसे खतरनाक है, क्योंकि इससे निकलने वाले रेडियोएक्टिव विकिरण ना सिर्फ मनुष्यों के लिए बल्कि समस्त जीव-जंतुओं और हमारी पृथ्वी के लिए भी बहुत ही खतरनाक है।

इसके कारण धरती का तापमान धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जिससे ग्लेशियर पिघल रहे हैं और समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है, जो हम सभी के लिए खतरे की घंटी है। इसके अलावा इससे मनुष्यों के अंदर अनुवांशिक विकार उत्पन्न हो जाता है, तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां उत्पन्न होती है।

यह इतना खतरनाक है कि यह प्रदूषण जहां पर भी उत्पन्न होता है, उस जगह पर जीवन का होना अत्यंत कठिन हो जाता है, और इसके प्रभाव में आते ही जीव जंतुओं की आकस्मिक मौत हो जाती है।

इतिहास गवाह है कि अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम का प्रयोग किया था, तो उससे कितनी बड़ी तबाही मची हुई थी। और उसका दुष्परिणाम आज भी जापान में देखने को मिलता है, वहां के लोग अभी भी अपंगता तथा शारीरिक विकार के साथ जन्म ले रहे हैं।

प्रदूषण की समस्या के नुकसान

प्रदूषण की समस्या के नुकसान ही नुकसान है, इससे होने वाले कुछ प्रमुख खतरों के बारे में हमने नीचे बताया हुआ है।

  • प्रदूषण के कारण धरती का तापमान धीरे धीरे बढ़ता ही जा रहा है, जिससे अनियमित रूप से धरती के वातावरण में परिवर्तन हो रहा है और असमय अम्लीय वर्षा होने लगी है। इसके कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं और समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। ठीक समय पर वर्षा नहीं होती है और जीव जंतुओं को गर्मी को झेलने में परेशानी होने लगी है।
  • प्रदूषण के कारण विभिन्न प्रकार की हानिकारक बीमारियां बढ़ने लगी हैं और मनुष्यों के प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ रही है।
  • प्रदूषण के कारण ही धरती से उत्पन्न होने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में कमी आई है।
  • प्रदूषण के कारण धरती के वायुमंडल में उपस्थित ओजोन परत में छेद हो गया है, और यह परत धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। ओजोन परत सूर्य से पृथ्वी पर आने वाली हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों को रोकती है। क्योंकि यह किरणें मनुष्य के लिए बहुत ही हानिकारक होती हैं, इससे इंसानों को त्वचा की बीमारियां तथा कैंसर आदि होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
  • प्रदूषण के कारण ही समुद्र के जल की गुणवत्ता में कमी आ गई है, और वह दूषित हो चुका है। जिससे उनमें रहने वाले जीव जंतुओं के जीवन पर खतरा मंडराने लगा है। और इससे वर्षा के रूप में आने वाले समुद्र के पानी से इंसानों के जीवन को भी खतरा है।

प्रदूषण की समस्या का समाधान

आज के समय में बढ़ते हुए प्रदूषण को रोकने का सबसे बढ़िया उपाय यही है, कि हम वनों की कटाई कम करके पेड़ पौधों को अधिक से अधिक लगाएं। इसके अलावा भी कुछ महत्वपूर्ण उपाय हैं जिनका इस्तेमाल करते हम बढ़ते हुए प्रदूषण को कम कर सकते हैं।

  • सबसे पहले हमें अधिक से अधिक मात्रा में पेड़ पौधे लगाने चाहिए जोकि धरती में कार्बन-डाइऑक्साइड की मात्रा को कम करके, ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाते हैं। क्योंकि ऑक्सीजन समस्त जीवधारियों के लिए प्राणवायु है।
  • हमें जीवन के विकास के लिए हानिकारक ऊर्जा स्रोतों जैसे परमाणु ऊर्जा, पेट्रोल, डीजल आदि के उपयोग को कम करके, ऊर्जा के स्वच्छ स्रोतों जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा आदि को बढ़ावा देना चाहिए। इसके अलावा ऊर्जा का अनावश्यक खपत नहीं करना चाहिए।
  • हमें प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करना चाहिए और उसकी जगह पर कपड़े आदि से बने हुए थैलों का प्रयोग करना चाहिए।
  • हमें किसी भी प्रकार के हानिकारक पदार्थों को नदी नालों आदि में नहीं मिलाना चाहिए और नदियों को स्वच्छ रखना चाहिए।
  • किसी भी प्रकार के हानिकारक कीटनाशक दवाइयों आदि का प्रयोग खेती के लिए नहीं करना चाहिए बल्कि उसकी जगह पर प्राकृतिक रूप से बने हुए खाद का प्रयोग करना चाहिए।

Pollution Essay in Hindi |  उपसंहार

हम आशा करते हैं कि आपको प्रदूषण पर निबंध (Pollution Essay in Hindi) पसंद आया होगा। इसको पढ़ने के बाद आप यह समझ ही गए होंगे कि बढ़ता हुआ प्रदूषण समस्त जीवधारियों के जीवन के लिए कितना हानिकारक है। बढ़ता हुआ प्रदूषण समस्त जीव जंतुओं के जीवन का विनाश कर सकता है। और इससे पृथ्वी पर उपस्थित समस्त प्राणी प्रभावित होंगे।

इसलिए प्रदूषण की वृद्धि को रोकने के लिए हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए तथा अन्य कारगर उपायों का इस्तेमाल करना चाहिए।

प्रदूषण को रोकने से ही हमारा पर्यावरण स्वस्थ बना रहेगा और इससे हम सभी मनुष्य तथा जीव जंतुओं के जीवन के विकास में वृद्धि होगी।

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